Friday, 17 May 2013

वर्तमान समय  हमारी रचनात्मकता के लिए सबसे संघर्ष पूर्ण समय है जिसका सामना करना लेखक के लिए  सबसे बड़ी  चुनौती है  छोटे शहरों की वास्तविकताओं और आवश्यकता  को समझते हुए मुंबई से आये युवा रंगकर्मी अभिनव पाण्डेय नाट्यकला के प्रचार -प्रसार में सक्रिय हो रहे हैं निश्चय ही वे बधाई के पात्र हैं । रास्ते बने और मशाल जले यही कामना है । अर्पणा ......................................

Tuesday, 7 May 2013

किशोरकुमार का कवि रूप -
दुर्लभ कविता की पंक्तियाँ _
पनसो पदारथ ,सब जहान को सुधारथ ,
गायन को बढ़ावत जामेंचुना चौकसाई  है।
सुपरिण के साथ-साथ मसाल  मिले भांत -भांत ,
जामे कत्थे की रत्ती भर लाली   

Monday, 22 April 2013

आज एक " गूंगी गुडिया " साक्षात् चंडी के अवतार में तब्दील हो चुकी है , समय की यही मांग है .
अब सभी गुड़ियों को एकजुट होकर कलयुगी महिषासुर का मर्दन करना आवश्यक हो गया है .
अर्पणा .............................

Tuesday, 16 April 2013

पुणे में रहूँ या कानपुर में, क्या फर्क पड़ता है मेरे मित्रों जानती हूँ कि ,आखिर हमें रहना है। एक ही जगह - दिल में दिल से ज्यादा ह्रदय में और- ह्रदय से ज्यादा "आत्मा " में अर्पणा .....................

Monday, 11 March 2013

prem ek kriya hai.
yah kbhi thakata nahin hai .
prem karne ke liye shuru men dekh-bhal  or karuna ka bhav odna   padta hai .
sath hi aapsi aadan-pradan shuru hota hai , tab dono hi taraf sachche prem ka ankur futta hai.ab nkab chehre men tabdil hota hai,fir utpadakta badti hai,sambndhon me nikhar aata hai,

Thursday, 3 January 2013


नर हो, न निराश करो मन को।

आज हम चारों तरफ नजर दौडाएं तो, जो द्रश्य आखों के सामने उभरता है, वह सचमुच परेशान करने वाला है .मन कभी-कभी बैठ जाता है चोरी, डकैती, हिंसा ,बलात्कार, आरोप -प्रत्यारोप का कुछ ऐसा वातावरण बन गया है,  कि लगता है कि जैसे  कोई ईमानदार आदमी रह ही नहीं गया है।
जो ईमानदारी से मेहनत  करते है, और अपनी जीविका चलते है, वे निरीह, भोले-भाले श्रमजीवी पिस रहे हैं।  ईमानदारी को मुर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है। सच्चाई तो केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से में  पड़ी है, ऐसे में उनकी भी आस्था हिलने लगी है।
ये बातें नई नहीं है पर इसकी विभत्सता शायद पहले कभी इतनी बिकराल होकर नहीं प्रकट हुई थी।
पर मेरे मन ! अभी निराश होने की जरुरत नहीं है।
2013 में एक मशाल तो जली -ही है। यदि बुरी बातों का ही ख्याल रखूं ,तो  जीवन कष्टकर  हो जायेगा। जीवन में बहुत सी घटनाएँ ऐसी भी होती है,जहाँ लोगों ने अकारण ही सहायता की है, निराश मन को ढाढस दिया है और हिम्मत बंधाई है ।
आशा की  ज्योति अब पूरे भारत में जल गई है ,इसे अब कभी बुझने न दिया जाये ।
अपर्णा ............................