वर्तमान समय हमारी रचनात्मकता के लिए सबसे संघर्ष पूर्ण समय है जिसका सामना करना लेखक के लिए सबसे बड़ी चुनौती है छोटे शहरों की वास्तविकताओं और आवश्यकता को समझते हुए मुंबई से आये युवा रंगकर्मी अभिनव पाण्डेय नाट्यकला के प्रचार -प्रसार में सक्रिय हो रहे हैं निश्चय ही वे बधाई के पात्र हैं । रास्ते बने और मशाल जले यही कामना है । अर्पणा ......................................
Friday, 17 May 2013
Tuesday, 7 May 2013
Monday, 22 April 2013
Tuesday, 16 April 2013
Monday, 18 March 2013
Monday, 11 March 2013
prem ek kriya hai.
yah kbhi thakata nahin hai .
prem karne ke liye shuru men dekh-bhal or karuna ka bhav odna padta hai .
sath hi aapsi aadan-pradan shuru hota hai , tab dono hi taraf sachche prem ka ankur futta hai.ab nkab chehre men tabdil hota hai,fir utpadakta badti hai,sambndhon me nikhar aata hai,
Thursday, 3 January 2013
नर हो, न निराश करो मन को।
आज हम चारों तरफ नजर दौडाएं तो, जो द्रश्य आखों के सामने उभरता है, वह सचमुच परेशान करने वाला है .मन कभी-कभी बैठ जाता है चोरी, डकैती, हिंसा ,बलात्कार, आरोप -प्रत्यारोप का कुछ ऐसा वातावरण बन गया है, कि लगता है कि जैसे कोई ईमानदार आदमी रह ही नहीं गया है।
जो ईमानदारी से मेहनत करते है, और अपनी जीविका चलते है, वे निरीह, भोले-भाले श्रमजीवी पिस रहे हैं। ईमानदारी को मुर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है। सच्चाई तो केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से में पड़ी है, ऐसे में उनकी भी आस्था हिलने लगी है।
ये बातें नई नहीं है पर इसकी विभत्सता शायद पहले कभी इतनी बिकराल होकर नहीं प्रकट हुई थी।
पर मेरे मन ! अभी निराश होने की जरुरत नहीं है।
2013 में एक मशाल तो जली -ही है। यदि बुरी बातों का ही ख्याल रखूं ,तो जीवन कष्टकर हो जायेगा। जीवन में बहुत सी घटनाएँ ऐसी भी होती है,जहाँ लोगों ने अकारण ही सहायता की है, निराश मन को ढाढस दिया है और हिम्मत बंधाई है ।
आशा की ज्योति अब पूरे भारत में जल गई है ,इसे अब कभी बुझने न दिया जाये ।
अपर्णा ............................
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