इनकी तीन कन्याएं हुई प्रसूति देवहुति और आहुति
देव मतलब जिसने भगवान को बुलाया हो वह देव और मन की देखे वो देवता
जो नर इशारे से बुलाए वो इंसान और जो कहे से भी न करे वो नर पशु समान
देवहुति की शादी krdabh ऋषि से हुईं एक बार krdabh ऋषि तपस्या मैं लीन थे. ओम नमो bhgvte वासुदेव. ये द्वादश अक्षर का प्रधान मंत्र है इधर नारदजी ने ऋषि को बता दिया था कि मनु और शतरूपा अपनी देवहुति का विवाह आप से करेंगे.. ऋषि सोच रहे कि ये राजकुल की कन्या कैसे रहेगी तो ऋषि ने मनु शतरूपा को बहुत समझाया लेकिन वे नहीं माने और देवहुति का विवाह ऋषि से कर के वापस ब्रम्हा वृत्त चले गए. इधर देवहुति पति का सारा काम मन से समझ कर कर लेती थी अब ऋषि ने देवहुति की परीक्षा लेने के लिये 100 वर्षों तक के लिए समाधि लगा ली. किन्तु जब वे जागे तो तो उन्होंने देवहुति को अपने काम में पहले की तरह ही तल्लीन पाया और भेष बदल कर बोले देवी तुम कौन हो तब देवहुति ने अपना परिचय दिया. ऋषि प्रसन्न होकर बोले हम तुमसे प्रसन्न हुए कोई वरदान मांगों तब देवहुति नें वरदान मैं बच्चों की कामना की तब ऋषि ने कहा जाओ बिंदु सरोवर में स्नान करके आओ और से स्वयं भी स्नान करने चले गये और दोनों युवा रुप में हो गये उसके बाद लगातार 9 कन्याएं हुई तब देवहुति ने एक पुत्र की कामना की तब पुत्र रूप में कपिल भगवान का अवतार हुआ l
अब krdabh ऋषि पुत्र जन्म के बाद फिर से जंगल में तपस्या करने चले गए.
Achutm keshvm राम..........
No comments:
Post a Comment